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सामाजिक संघर्ष, गरीबी और मानवीय विवशता को दर्शाता एक यथार्थवादी भावनात्मक दृश्य।

मंटो, सच आज भी वही है दोस्त…

“मंटो… सच आज भी वही है दोस्त…” समाज, ज़रूरत, गरीबी और संवेदनहीनता की उन परतों को उजागर करती कविता है, जहाँ हालात इंसान और व्यवस्था दोनों को बेनकाब कर देते हैं।

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