gulmohar
सर्द सुबह में धुंध से घिरा शहर, हल्की धूप, लोग ऊनी कपड़ों में अलाव के पास बैठे हुए

सूरज ओढ़े रजाई

यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.

Read More

बारह मासा 

“चैत्र की चपलता और बैसाख की तपिश से लेकर सावन की झूलों वाली हरियाली और भादो के घने बादलों तक, यह काव्य भारतीय मासों का रंगीन चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें ऋतुओं के बदलते रंग, प्रकृति का सौंदर्य और ग्रामीण जीवन की सहज लय एक साथ बुनी गई है, जो पाठक को पूरे वर्ष के मौसम सफर पर ले जाती है।”

Read More