सन्नाटे में चीख
इमारत के छोटे से फ़्लैट में रहने वाले सक्सेना दंपती की ज़िंदगी एक-दूसरे के इर्द-गिर्द सिमटी थी। लेकिन एक सुबह अचानक आई आंटी की मौत ने सब कुछ बदल दिया। लकवे से ग्रस्त अंकल अपनी आँखों के सामने सब कुछ होते हुए देख भी कुछ नहीं कर पाए। यह हृदयविदारक घटना अकेले रह रहे बुज़ुर्गों की असहायता और समाज की अनदेखी पर गहरे सवाल खड़े करती है।
