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मुर्दों की सभा में कर्मों का हिसाब दिखाती हिंदी कविता

 “मुर्दों की हुई सभा”

अगर मृत्यु के बाद इंसान अपने जीवन का हिसाब खुद देख सके, तो उसके पास क्या बचेगा—धन, दौलत, रिश्ते या केवल कर्म? “मुर्दों की हुई सभा” इसी सवाल के माध्यम से जीवन का गहरा सच सामने रखती है।

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