हर जन्म की प्यास

मीठी नदी के आत्मस्वर में कही गई एक भावपूर्ण यात्रा है. जहाँ स्वप्नों की मिठास लेकर वह उदधि से मिलन को निकल पड़ती है। खारापन स्वीकार्य है, क्योंकि हर जन्म की प्यास वहीं शान्त होती है। वर्षों की भटकन, नयनों में भरा जल, और नमन से भरा समर्पण सब मिलकर प्रेम, प्रतीक्षा और स्वीकार की एक शान्त, उजली कथा रचते हैं।

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