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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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