साहित्य दीवारें LIVE WIRE NEWS NETWORK5 months ago5 months ago181 mins बेटे के नए घर की चमक-दमक देखकर भी उसके मन में बस एक ही प्रश्न गूंजता रहा.“मेरी जगह कहाँ है?” कुछ दिन रुककर लौटी तो अपने पुराने घर की दीवारें भी जैसे समझा रही थीं.“अभी थकना नहीं… तेरे हिस्से का इंतज़ार अभी बाकी है।” Read More