मध्यप्रदेश के मांडू का भावनात्मक और ऐतिहासिक वर्णन, जहाँ खंडहरों की खामोशी, महलों की भव्यता, मानसून की वादियाँ और रात में दूर से आती बाँसुरी व लोकगीतों की आवाज़ें प्रेम और विरह का वातावरण रचती हैं. रानी रुपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेमकथा, नर्मदा दर्शन वाला महल, मुगल काल का संघर्ष, बलिदान, समाधियाँ और सदियों बाद भी हवा में सांस लेता प्रेम मांडू को सिटी ऑफ लव के रूप में प्रस्तुत करता है.

अपनी-अपनी रुपमती : ‘मांडू’ सिटी ऑफ लव

दुनिया मांडू को सिटी ऑफ जॉय कहती है, लेकिन जो एक बार उसे ठहरकर महसूस कर ले, उसके लिए मांडू हमेशा सिटी ऑफ लव ही रहता है। मध्यप्रदेश के तमाम पर्यटन स्थलों में अगर किसी जगह की हवा में सबसे ज़्यादा भावनाएँ घुली हैं, तो वह मांडू है। यहाँ महलों की भव्यता से ज़्यादा, खंडहरों की खामोशी बोलती है।

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खंडहर महल

कभी ये महल रोशनी और रौनक से भरे रहते थे। उनकी दीवारों पर तस्वीरें मुस्कुराती थीं और झरोखों से सपनों की हवाएँ बहती थीं। लेकिन आज वही महल खामोश और वीरान खड़े हैं। उनकी दरारों में घास उग आई है और सन्नाटा इतना गहरा है कि बस हवा की गूंज सुनाई देती है, जैसे वक्त सब कुछ चुपचाप चुरा ले गया हो। जहाँ कभी कदमों की आहट और राग–रंग की महफ़िलें सजती थीं, वहाँ अब धूल और पत्थरों की चादर बिछी है। ये खंडहर सिर्फ टूटे पत्थर नहीं, बल्कि समय के साक्षी हैं, जो बताते हैं कि वैभव मिट जाता है, पर इतिहास हमेशा जीवित रहता है।

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