भारी बारिश और बाढ़ के बीच नदी किनारे खड़ा एक गरीब ग्रामीण व्यक्ति, दूर झोपड़ी की ओर देखते हुए भावुक और चिंतित मुद्रा में।

जिजीविषा

कोसी नदी के उफान, गरीबी और लाचारी के बीच घिरा मंगरु एक पल के लिए हार मानने को तैयार हो जाता है, लेकिन पत्नी और बेटी का चेहरा उसे फिर जीने की ताकत दे देता है। “जिजीविषा” जीवन से हार न मानने की मार्मिक कथा है।

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