महिदपुर रोड के बाजार में दुकान के बाहर रखी पारंपरिक कुर्सी का दृश्य

कुर्सी का किस्सा: यादों में बसती एक परंपरा

महिदपुर रोड के बाजार में दुकानों के बाहर रखी एक साधारण कुर्सी कभी व्यापार की एक अनोखी परंपरा का प्रतीक हुआ करती थी। यह कुर्सी बताती थी कि दुकान की ‘बोनी’ हुई है या नहीं, और इसी के साथ जुड़ी थी आपसी समझ, अपनापन और बाजार की अनकही भाषा। आज भले ही समय बदल गया हो, लेकिन यह कुर्सी अब भी उन सुनहरी यादों को जीवित रखे हुए है।

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