कर्म का फल
आज जिस तरह फूटे घड़े से सूखे पौधों पर पानी गिरा और फूल खिल उठे, उसी तरह आज मेरे कर्मों का फल मुझे मेरे पोते की सफलता के रूप में मिला है।”

आज जिस तरह फूटे घड़े से सूखे पौधों पर पानी गिरा और फूल खिल उठे, उसी तरह आज मेरे कर्मों का फल मुझे मेरे पोते की सफलता के रूप में मिला है।”