Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

दिल पिघल गया

नन्ही रवनीत ने अपने अतिरिक्त जूते सहपाठी खुशी को देकर यह सिखा दिया कि संस्कार केवल शब्द नहीं होते, वे संवेदना बनकर जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान भी बनते हैं।

Read More

“जहां से मैं शुरू हुई, वहां मैं नहीं रुकी”

प्रभा ने जीवन भर त्याग और समर्पण सीखा, लेकिन जब अपनी बेटी की बातों ने उसे आईना दिखाया, तो उसने खुद के अस्तित्व की तलाश शुरू की। आज, वह सिर्फ किसी की पत्नी या बहू नहीं, बल्कि एक शिक्षिका, एक मार्गदर्शक और एक सफल स्त्री है — अपनी पहचान के साथ।”

Read More