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हाँ, मौन हूँ मैं कहानी

हाँ, मौन हूँ मैं

कभी-कभी स्त्री इसलिए मौन नहीं होती कि उसके पास कहने को कुछ नहीं होता, बल्कि इसलिए कि उसके शब्दों को सुनने वाला कोई नहीं होता। ‘हाँ, मौन हूँ मैं’ एक ऐसी लेखिका की कहानी है, जिसने अपने प्रेम और रिश्ते को बचाने के लिए अपने सपनों को चुप करा दिया, लेकिन अंततः उसका मौन समझा गया और उसके शब्दों ने फिर जन्म लिया।

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