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स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणें जब धरती को आलोकित करती हैं, तब प्रकृति का हर कण जीवन, सौंदर्य और नवचेतना का संदेश देता है

स्वर्णिम प्रभात

स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणों से आलोकित यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य, पक्षियों के मधुर कलरव, उषा की मनोहारी लालिमा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह रचना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना जागृत करती है।

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नीले आकाश, हरे-भरे जंगलों, पर्वतों, नदी और झरनों से सजा प्राकृतिक दृश्य, जहाँ एक व्यक्ति पौधा लगा रहा है। आसपास पक्षी और वन्यजीव दिखाई दे रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और धरती माता की सुंदरता का संदेश दे रहे हैं।

नीला अम्बर, स्वच्छ पवन

“नीला अम्बर, स्वच्छ पवन है” कविता प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और धरती माता के प्रति मानव के कर्तव्यों को दर्शाती है। यह रचना पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।

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मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

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