रात के शांत वातावरण में एक युवक अपनी मां के नाम भावुक पत्र लिखता हुआ दिखाई दे रहा है, पास में हल्की पीली रोशनी वाला लैम्प, पीछे धुंधली यादों में मां और बहन की छवियां उभरती हुईं, जो पारिवारिक संवेदनाओं और समान परवरिश के भाव को दर्शाती हैं।

मां, मुझे भी रोने का हक चाहिए था

एक बेटे का अपनी मां के नाम लिखा गया यह भावुक पत्र समाज में बेटों और बेटियों की परवरिश के अंतर, पुरुषों की भावनाओं और बदलते समय की जरूरतों पर गंभीर सवाल उठाता है।

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