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वो भी इंसान है… बस कह नहीं पाता।

वो पुरुष

“वो पुरुष” एक गहरी और संवेदनशील कविता है, जो पुरुष के जीवन में छिपे संघर्ष, जिम्मेदारियों और अनकही भावनाओं को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि मजबूती के पीछे भी एक थका हुआ और संवेदनशील दिल होता है।

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