रात के शांत वातावरण में एक युवक अपनी मां के नाम भावुक पत्र लिखता हुआ दिखाई दे रहा है, पास में हल्की पीली रोशनी वाला लैम्प, पीछे धुंधली यादों में मां और बहन की छवियां उभरती हुईं, जो पारिवारिक संवेदनाओं और समान परवरिश के भाव को दर्शाती हैं।

मां, मुझे भी रोने का हक चाहिए था

एक बेटे का अपनी मां के नाम लिखा गया यह भावुक पत्र समाज में बेटों और बेटियों की परवरिश के अंतर, पुरुषों की भावनाओं और बदलते समय की जरूरतों पर गंभीर सवाल उठाता है।

Read More

सिगड़ी के पास सिमटी यादें

सिगड़ी की गर्माहट, मैया का स्नेह, ताई जी का अनुशासन और मम्मी की टोका-टाकी संयुक्त परिवार के वे दिन आज भी दिल को छू जाते हैं। यह संस्मरण बचपन, संस्कार और रिश्तों की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ हर सीख स्नेह के साथ मिली।

Read More