Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
एक भारतीय गली में खड़ा वफ़ादार देसी कुत्ता गुस्से से एक शराबी व्यक्ति की ओर भौंक रहा है, जबकि पास में एक वृद्ध महिला सुरक्षित खड़ी है। दृश्य साहस, सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।

‘सबक’

‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?

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अलविदा झामरी

झामरी एक ट्रांसजेंडर गोल्डन रिट्रीवर थी, जो गुमनामी में आई और चुपचाप सबकी प्रिय बनकर चली गई। माताजी मंदिर के सामने बिताया उसका शांत जीवन, अनिल परमार का स्नेह और अंत में सम्मानजनक विदाई यह सिखाती है कि करुणा और अपनापन शब्दों के मोहताज नहीं होते।

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फुगी, नवी और मैं

वी घाव चाटकर बिल्ली को ठीक करती है, कबूतर के मरने पर रोती है, और हर जीव को अपनाने की अद्भुत ताकत रखती है। कभी-कभी लगता है वह बोल नहीं सकती, पर सुनना, समझना और प्रेम बाँटना उसे हम इंसानों से कहीं बेहतर आता है।

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