विरह

निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।

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मासूम मुस्कान और गहरे रहस्यमयी नयनों वाली साधारण भारतीय युवती

कसक

यह कविता एक ऐसी साधारण लेकिन रहस्यमयी स्त्री के सौंदर्य और भावनाओं का चित्रण करती है, जिसकी मासूम मुस्कान और गहरे नयन किसी वेद की तरह गूढ़ प्रतीत होते हैं। बिना श्रृंगार की सादगी, उसके व्यक्तित्व को और भी आकर्षक बनाती है। हर पंक्ति में प्रेम, रहस्य और भावनाओं की गहराई झलकती है।

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