Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

नव अंकुर की आस

नवपल्लवित पौधा अपनी कोमल जड़ों से धरती का आशीर्वाद लेकर जीवन की नई शुरुआत करता है। वह नव अंबर और नव भोर के साक्षी के रूप में जन्म लेता है, अपने भीतर जीवन की नयी आस संजोए हुए। चारों ओर फैले उपवन की मधुर सुवास उसे उल्लास से भर देती है। वह अभी शिशु है, पर हर दिन वायु और जल का स्पर्श पाकर बढ़ने की आकांक्षा रखता है।

वह जानता है कि एक दिन वह विशाल वृक्ष बनेगा—जिसकी छाया में संसार विश्राम करेगा, जो अनगिनत जीवों को ऑक्सीजन और जीवनदान देगा। उसका अस्तित्व निःस्वार्थ है, उसका हर अंश किसी न किसी के काम आने वाला है

Read More