मंदिर के बाहर बैठी असहाय बुजुर्ग महिला और दानपात्र की ओर जाते श्रद्धालु।

दान का असली धर्म

मंदिरों में चढ़ने वाले करोड़ों के चढ़ावे और एक असहाय माँ की खाली झोली के बीच खड़ा यह लेख एक बड़ा सवाल पूछता है—क्या भगवान को सोने का मुकुट चाहिए या किसी जरूरतमंद का सहारा? आस्था और मानव सेवा पर आधारित यह विचारोत्तेजक व्यंग्य सोचने पर मजबूर करता है।

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