मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, इसे व्यर्थ न गंवाएं
नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।
