खंडहर महल
कभी ये महल रोशनी और रौनक से भरे रहते थे। उनकी दीवारों पर तस्वीरें मुस्कुराती थीं और झरोखों से सपनों की हवाएँ बहती थीं। लेकिन आज वही महल खामोश और वीरान खड़े हैं। उनकी दरारों में घास उग आई है और सन्नाटा इतना गहरा है कि बस हवा की गूंज सुनाई देती है, जैसे वक्त सब कुछ चुपचाप चुरा ले गया हो। जहाँ कभी कदमों की आहट और राग–रंग की महफ़िलें सजती थीं, वहाँ अब धूल और पत्थरों की चादर बिछी है। ये खंडहर सिर्फ टूटे पत्थर नहीं, बल्कि समय के साक्षी हैं, जो बताते हैं कि वैभव मिट जाता है, पर इतिहास हमेशा जीवित रहता है।
