चरित्र का तराजू
जब एक ही रिश्ते में पुरुष की आज़ादी को अधिकार और स्त्री की आज़ादी को चरित्र का सवाल बना दिया जाए, तो समस्या सिर्फ रिश्ते में नहीं, बल्कि उस सोच में होती है जो दोनों के लिए अलग-अलग नैतिकता तय करती है।

जब एक ही रिश्ते में पुरुष की आज़ादी को अधिकार और स्त्री की आज़ादी को चरित्र का सवाल बना दिया जाए, तो समस्या सिर्फ रिश्ते में नहीं, बल्कि उस सोच में होती है जो दोनों के लिए अलग-अलग नैतिकता तय करती है।