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एक युवती गंभीर भाव से मोबाइल स्क्रीन देख रही है, जबकि पीछे खड़ा युवक मुस्कुरा रहा है और वातावरण में विश्वास व छल का प्रतीकात्मक भाव है।

मुखौटा

‘दोस्ती के रूप में साज़िश’ एक ऐसी विचारोत्तेजक कहानी है, जो बताती है कि हर दुखभरी कहानी सच नहीं होती। भावनात्मक छल, झूठी सहानुभूति और विश्वास के दुरुपयोग के बीच एक संवेदनशील लड़की अपनी सूझबूझ से सच्चाई तक पहुँचती है। यह कहानी सिखाती है कि केवल दयालु होना ही नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण होना भी जीवन में उतना ही आवश्यक है।

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