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नेत्रदान और देहदान कर अमर हो गईं सुशीला दिवेकर

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बचाय अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि दिवेकर ने अपनी माता सुशीला दिवेकर की पार्थिव देह दान कर दी। इससे पहले 77 वर्षीय दिवेकर के नेत्रदान भी कराए गए। प्रशासन और पुलिस ने ऐसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इसे अनुकरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली घटना बताया।

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