सुनहरी किनारी
एक छोटी बच्ची की फैंसी ड्रेस ठीक कराने के लिए माँ पुराने दर्जी शेरा भाई के पास पहुँचती है. एक पुरानी पोशाक में लगी सुनहरी किनारी सिर्फ ड्रेस नहीं सँवारती, बल्कि माँ की सोच को भी एक नई दिशा देती है.

एक छोटी बच्ची की फैंसी ड्रेस ठीक कराने के लिए माँ पुराने दर्जी शेरा भाई के पास पहुँचती है. एक पुरानी पोशाक में लगी सुनहरी किनारी सिर्फ ड्रेस नहीं सँवारती, बल्कि माँ की सोच को भी एक नई दिशा देती है.