आख़िरी रात
ज़ीनत की ज़िंदगी बागबानी, परिवार और अपने छात्रों के बीच खुशी से बीत रही थी। शादी की सालगिरह मनाने के लिए वह अपने पति फ़रीद और बेटे के साथ मुंबई के ताज होटल पहुँचती है। लेकिन 26 नवंबर 2008 की वह रात उनकी ज़िंदगी की सबसे भयावह रात बन जाती है। गोलियों, धमाकों और दहशत के बीच यह कहानी सिर्फ़ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि इंसानियत, प्रेम और आतंकवाद के खिलाफ़ खड़े होने वाले साहस की भी मार्मिक दास्तान है।
