झील के किनारे
झील के किनारे रोज़ प्रेमी जोड़ों को देखकर लगता था कि यहाँ सिर्फ नई जोड़ियाँ बनती हैं. लेकिन एक शाम सुनी गई बातचीत ने एहसास कराया कि कुछ रिश्ते जहाँ शुरू होते हैं, वहीं कुछ बसी-बसाई गृहस्थियाँ भी टूटने लगती हैं.

झील के किनारे रोज़ प्रेमी जोड़ों को देखकर लगता था कि यहाँ सिर्फ नई जोड़ियाँ बनती हैं. लेकिन एक शाम सुनी गई बातचीत ने एहसास कराया कि कुछ रिश्ते जहाँ शुरू होते हैं, वहीं कुछ बसी-बसाई गृहस्थियाँ भी टूटने लगती हैं.