…जब विदाई ने रोशनी ओढ़ ली
श्रीमती शकुंतला बोहरा के नेत्रदान ने शोक की घड़ी को मानवता के उजाले में बदल दिया। यह भावुक कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार ने अपने निजी दुःख को दो अनजान ज़िंदगियों की रोशनी बना दिया और समाज के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।

श्रीमती शकुंतला बोहरा के नेत्रदान ने शोक की घड़ी को मानवता के उजाले में बदल दिया। यह भावुक कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार ने अपने निजी दुःख को दो अनजान ज़िंदगियों की रोशनी बना दिया और समाज के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।
अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद शाखा महिदपुर रोड द्वारा शत्रुंजय महातीर्थ पालीताणा की 7 यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया।