अकेला व्यक्ति भीड़ में खोया हुआ

माफ़ कर दे मुझे…

यह ग़ज़ल एक टूटे हुए दिल की सच्ची पुकार है, जहाँ प्रेम अब भी जीवित है, लेकिन रिश्ते की दूरी उसे लगातार घायल करती रहती है। शायर ने बड़ी सादगी और गहराई से उस भावना को व्यक्त किया है, जब इंसान अपने ही प्रेम में खुद को खो देता है।

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