Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

आज भी है…

तेरी चाहत आज भी मेरे पहलू में जिंदा है। तू अपनी ज़िंदगी में मुझे कभी मयस्सर न हुआ, लेकिन मेरे खयालों में तू आज भी मौजूद है। मैं तेरी यादों को अक्सर रुख़सत कर देती हूँ, लेकिन वे ख्वाबों की दहलीज़ पर दस्तक देकर फिर लौट आती हैं। मुद्दतें बीत गईं, दिन ढले, रातें गुज़रीं, मगर सीने में वही खलिश आज भी बाकी है। दिल अक्सर कहता है कि रूबाइयों के कुछ पल मेरे हिस्से में भी होंगे, और मैं उन लम्हों की आस में जीती रहती हूँ। तेरी यादों को मैं तकिए के नीचे महफूज़ रख देती हूँ, मगर आँसुओं से वह तकिया आज भी भीगता रहता है।

Read More