सुबह की धूप में आँगन, तुलसी पर चमकती ओस, मुंडेर पर बैठे कबूतर और शांत घरेलू वातावरण का काव्यात्मक दृश्य।

जीवन-सौंदर्य

आले में रखी नीली शीशी, हवा से हिलता अख़बार, तुलसी पर ठहरी ओस, बारिश की स्मृतियाँ और समय का अविराम प्रवाह यह कविता बताती है कि जीवन का वास्तविक सौंदर्य बड़े क्षणों में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की साधारण दिखने वाली अनुभूतियों में छिपा होता है।

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जब चिड़िया चुग गई खेत !

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में आगे बढ़ते हुए विनोद ने सफलता तो पा ली, लेकिन रिश्तों को समय देना भूल गया। करवाचौथ के दिन एक गजरा उसे एहसास दिला देता है कि प्यार बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटे पलों में छिपा होता है जिन्हें वह हमेशा टालता रहा। जब समझ आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

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