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बाबूजी की हाथ घड़ी

मेरे पिताजी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, जिनकी तनख्वाह कम थी, लेकिन आत्मसम्मान और ज्ञान कूट-कूट कर भरा था। साल 1974 में उनके तबादले के समय, घर का सारा खर्च उधारी पर चलता था। घर का सामान बैलगाड़ी में शिफ्ट करना था, लेकिन पिताजी ने सबसे पहले 60 रुपए का उधार चुकाया। इसके लिए उन्होंने अपनी प्रिय सुनहरे डायल वाली हैनरी सैंडो घड़ी बेच दी।

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