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मेहनतकश माँ को काम करते देखते हुए उसका छोटा बेटा

वह आती है

थके कदमों में भी उजास और साँसों में विश्वास लिए आगे बढ़ती एक मेहनतकश माँ. यह कविता उसके श्रम, मातृत्व, संघर्ष और अपने बच्चों के लिए बुने जा रहे बेहतर भविष्य की मार्मिक कहानी कहती है.

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 सोच बदल गई

कभी-कभी हमारी भलाई की सोच भी सामने वाले के लिए बोझ बन जाती है. नीलम ने यह समझा कि उपहार की कीमत से ज़्यादा उसकी गरिमा और अपनापन मायने रखता है. सीमा के एक सधे हुए उत्तर ने नीलम की सोच बदल दी और यह सिखा दिया कि उपहार महँगा नहीं, बल्कि नया और सम्मानजनक होना चाहिए.

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