gulmohar

अधूरे ख़्वाबों का सफ़र

दिल एक स्थायी ठिकाना नहीं है, यह किसी मुसाफ़िर का डेरा है। कभी यह ठहर जाता है, तो कभी अचानक कहीं और निकल पड़ता है। इसमें रुकने का कोई नियम नहीं है—यह क्षणिक है, चंचल है। इंसान सोचता है कि दिल अब सुकून पाएगा, किन्हीं भावनाओं में ठहर जाएगा, मगर अगले ही पल यह फिर चल पड़ता है, नई राहों की तलाश में। जैसे कोई मुसाफ़िर यात्रा के बीच कहीं विश्राम करता है और फिर सुबह होते ही अगले पड़ाव की ओर निकल जाता है, वैसे ही दिल भी है—कभी आता है, कभी ठहरता है और फिर चुपचाप आगे बढ़ जाता है।

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