जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

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मुक्ति की राह : ज्ञान, कर्म और परमधाम

आत्मा परमधाम की वासी है—पवित्र, दोषरहित। स्थूल लोक में कर्मों के प्रभाव से वह अपवित्र होती है, इसलिए स्वयं परमात्मा आकर ज्ञान के माध्यम से आत्मा को फिर से पावन बनाते हैं और उसे मुक्ति की ओर ले जाते हैं।

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