बरसाती शाम में कसारी से महिदपुर रोड के सुनसान कच्चे रास्ते पर दूध की केटली लिए चलता बालक और दूर दिखाई देती सफेद परछाई।

भूत समझा, माइलस्टोन निकला

महिदपुर रोड और कसारी के पुराने सुनसान रास्तों की पृष्ठभूमि में लिखा यह संस्मरण बचपन के डर, ग्रामीण जीवन और कल्पना की उड़ान को जीवंत करता है। एक सफेद परछाई, भूत का भ्रम और अंत में उसका माइलस्टोन निकलना—कहानी को रोचक और भावनात्मक बना देता है।

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