चन्दन की चांदनी

चांदनी का यह पहला करवा चौथ था, लेकिन उसका पति चन्दन उसके साथ नहीं था। शादी को अभी साल भी पूरा नहीं हुआ था और चंदन को हेड ऑफिस के बुलावे पर अपनी ड्यूटी पर जाना पड़ा। उदास चांदनी को सासुमा ने प्यार से समझा-बुझाकर नई लाल सिल्क साड़ी और गहने दिलवाए।
जब चांद निकला, चांदनी ने छलनी से उसे देखा और अपने पति की याद में मनुहार की। तभी सही वक्त पर वीडियो कॉल आया — चंदन मुस्कुराते हुए सामने था। खुशी और प्यार से भरी यह पल सभी सुहागिनों के लिए भी आनंदमय था। सासू मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “इन्हें किसी की नज़र न लगे, इनके बीच अटूट प्यार बना रहे।”

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चिड़िया-सी उड़ान

मैं फिर से बच्ची बनना चाहती हूँ — बिना डर, बिना संकोच। खुलकर हँसना-रोना, बारिश में भीगना और सिर्फ माँ-पापा के दुलार में खो जाना। दुनिया की सोच से परे, कुछ पल के लिए सिर्फ अपने होने को जीना चाहती हूँ।”

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छप्पन वर्ष

“पचपन नहीं… छप्पन बरस हो गए हमारी शादी को।”वृद्धा ने हँसते हुए कहा, और वृद्ध भी मुस्करा दिए। सुबह से ही फोन की ट्रिन-ट्रिन ने उन्हें परेशान किया था, पर अब समझ आया. यह बच्चों की शुभकामनाओं की आवाज़ें थीं।
यादों की परतें खुलीं—इलाहाबाद के दिन, बच्चों की हंसी, कंधों पर बैठा कर दिखाई गई चौकी, रजाई के भीतर की मूँगफली… और आज वही बच्चे हिसाब मांगते हैं, शिकायतें करते हैं। पर इस सुबह आदित्य के गुलदस्ते और अर्चना की हंसी नेवृद्ध दंपति की आँखों को बारिश की बूँदों-सा चमका दिया।

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ज़िंदगी लेती है नए इम्तिहां

ज़िंदगी हमेशा नए-नए इम्तिहान लेती है। कभी वह मीत बनकर साथ देती है, तो कभी गिला करके दूर चली जाती है। दिल में आने वाले हर दिलकश एहसास का ज़रिया भी वही है। वह कभी हमें प्यार करना सिखाती है, तो कभी अहंकार से टकरा देती है। हर मोड़ पर उसके इम्तिहान अलग होते हैं—कभी तेज़ आँधियों के थपेड़े, तो कभी दर्द से भरा लंबा कारवाँ।

ऐसा मन होता है कि चाँद का एक टुकड़ा और आसमान की एक मुट्ठी पाकर, उन्हें पर्स में छुपा लिया जाए, ताकि कुछ पल सुकून के मिल सकें। उलझनों के बीच भी ज़िंदगी का ही सहारा है, पर उसकी खुशियों की चादर के नीचे दर्द का पाला भी बिछा है। सपनों के परिंदे अब भी उड़ान भरते हैं, मगर छोटे-छोटे ज़ख्म मिलकर एक काफ़िला बन गए हैं। ज़िंदगी ही मेरी साज़ है और मेरी सदा भी। उसी के साथ जीया है और उसी में मैंने अपने भगवान को खोजा है। हर लम्हा नया था, हर दर्द सहा—लेकिन अब दिल चाहता है कि वह थोड़ा ठहर जाए और मेरी हथेली में कुछ हसीं फूल खिला दे।

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