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मन का डेमेंशिया

सोचो, हम क्या दे सकते हैं किसीको, बिना सोचे समझे। जीवन अस्थाई है, फिर भी हम उम्मीदों से जुड़े रहते हैं। स्वप्न, हादसे, बीमारियाँ, खुशी, दुख — सब चला जाता है, बस स्मृतियाँ रह जाती हैं। ये स्मृतियाँ अक्सर दूसरों के लिए शेष रहती हैं, हमारे लिए नहीं। डेमेंशिया जैसी बीमारी याददाश्त और भावनाओं को बदल देती है, हमें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ती है और प्रेम की ऊर्जा को कमजोर कर देती है। इसलिए बेहतर है कि हम दूसरों को उनके जैसे ही छोड़ दें, स्वयं के विचारों को बदलें और अपना बेस्ट दें ताकि हमारी स्मृतियाँ दूसरों के लिए यादगार बनें।

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स्त्री है त्रिशक्ति

स्त्री वास्तव में त्रिशक्ति का प्रतीक है—वह शारदा की ज्ञानमयी छवि है, शिवा की त्याग और साहस भरी ऊर्जा है और श्री की समृद्धि और करुणा से भरपूर है। उसका स्वरूप कभी पीपल की ठंडी छाँव-सा शीतल है तो कभी सावन की झड़ी-सा तरल और जीवनदायी। ठिठुरती सर्दियों में वह गुनगुनी धूप बन जाती है। सृष्टि की शुरुआत भी उसी से होती है और अंत भी उसी में समाया हुआ है।

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