कहाँ आसान है एक स्त्री का कर्ण हो जाना
एक स्त्री अपने जीवन में कितने कवच-कुंडल धारण करती है? प्रेम, जिम्मेदारियों, सामाजिक मर्यादाओं और अपने अस्तित्व के बीच संघर्ष करती स्त्री के अंतर्द्वंद्व को कर्ण के रूपक में प्रस्तुत करता संवेदनशील लेख.

एक स्त्री अपने जीवन में कितने कवच-कुंडल धारण करती है? प्रेम, जिम्मेदारियों, सामाजिक मर्यादाओं और अपने अस्तित्व के बीच संघर्ष करती स्त्री के अंतर्द्वंद्व को कर्ण के रूपक में प्रस्तुत करता संवेदनशील लेख.
‘कर्ण की व्यथा’ महाभारत के महान योद्धा सूर्यपुत्र कर्ण के मन में छिपे उस दर्द को शब्द देती है, जहाँ जन्म, पहचान, रिश्ते और नियति के बीच उनका अकेलापन मुखर होकर सामने आता है। यह कविता पाठकों को कर्ण के अंतर्मन से जोड़ती है।