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कथनी और करनी के अंतर पर आधारित सामाजिक व्यंग्य हमाम के नंगे

हमाम के नंगे

जाति और धर्म से ऊपर उठने की बातें करने वाला आदर्शवाद जब रोजमर्रा के व्यवहार की छोटी-सी परीक्षा में बदल जाता है, तब कथनी और करनी का अंतर उजागर हो जाता है।

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