सांझ के धुंधले आकाश के नीचे एक सूखे पेड़ के पास बैठा अकेला व्यक्ति और उसकी शाखाओं पर बैठे खामोश परिंदे, जो खोए हुए सपनों और भीतर की पीड़ा का प्रतीक हैं।

‘असली और आख़िरी सज़ा’

कभी हमारे भीतर भी परिंदे बसते हैं—सपनों, इच्छाओं और उड़ानों के रूप में। लेकिन जब हम समझौतों के कारण उन्हें कैद कर देते हैं, तब उनकी खामोशी ही हमारी सबसे बड़ी और आख़िरी सज़ा बन जाती है।

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