भागती जिंदगी और खालीपन को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें समय की कमी, धन की दौड़ और सुकून से दूर होता आधुनिक मनुष्य दिखाई देता है

खाली हाथ जाना है…

यह कविता आधुनिक जीवन की भागदौड़, दौलत की अंधी दौड़ और सुकून से दूर होते इंसान की विडंबना को उजागर करती है। “मेरी-मेरी” में उलझे मनुष्य की मानसिकता और खोते मानवीय संबंधों पर यह एक गहरी, आत्ममंथन कराती हुई टिप्पणी है।

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