"भारतीय ग्रामीण आँगन में एक वृद्ध सास अपनी नवविवाहिता बहू को स्नेहपूर्वक गले लगाते हुए। बहू लाल दुल्हन के परिधान में है और दोनों की आँखों में भावुकता झलक रही है। पारंपरिक विवाह की सजावट, गेंदे के फूल और गोधूलि की सुनहरी रोशनी इस माँ-बेटी जैसे रिश्ते की आत्मीयता को दर्शा रही है।"

अनोखा रिश्ता

पति के विश्वासघात के बाद जब रीना का संसार उजड़ जाता है, तब उसकी सास शांता उसे अकेला नहीं छोड़ती। वह बहू को बेटी का दर्जा देकर अपनी पूरी संपत्ति उसके नाम करने का निर्णय लेती है। यह लघुकथा बताती है कि खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से रिश्ते बनते हैं।

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