भीड़भाड़ वाली शहर की सड़क पर अकेला बैठा एक उदास व्यक्ति, आसपास लोग मोबाइल में व्यस्त, आधुनिक जीवन की संवेदनहीनता और अकेलेपन का दृश्य

खामोश रिश्ते

यह कविता आधुनिक समाज की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ हर व्यक्ति अपनी ही बात कहने में व्यस्त है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं बचा। रिश्तों की निकटता केवल भौतिक रह गई है लोग पास होकर भी दूर हैं, और मन की पीड़ा अनसुनी रह जाती है।

Read More

दीवार

कहानी एक सफल लेकिन अकेले हो चुके इंसान— रविन्द्र के दर्द को दिखाती है। महंगे बंगले, नाम, शोहरत और पैसा होने के बावजूद वह अंदर से टूट चुका है, क्योंकि उसकी माँ अब नहीं रही। उसने माँ से वादा किया था कि उसे हर सुख देगा, पर उसी “बड़े मकान की दीवारों” ने बेटे और माँ के बीच दूरी बना दी। माँ शायद आख़िरी वक़्त में दर्द में थी, पर रविन्द्र को पता न चला क्योंकि “दीवारों” ने आवाज़ और अहसास रोक लिए।रविन्द्र आज पछता रहा है कि असली घर प्यार और साथ से बनता है, दीवारों से नहीं।यही दर्द और पछतावा पूरी कहानी का मूल है।

Read More