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गरीब मोची बच्चे को रिक्शे के लिए पैसे देते हुए

बड़े दिलवाला

कभी-कभी छोटी-सी मदद इंसान के दिल में ऐसी जगह बना लेती है, जिसे वर्षों बाद भी भुलाया नहीं जा सकता। यह कहानी एक गरीब मोची के बड़े दिल और उसकी सच्ची इंसानियत की मार्मिक याद है।

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पालने में सोते अनाथ बच्चे के पास मंडराती चिड़िया और ममता से भरी स्त्री

चिड़िया

कहीं एक स्त्री अपनी गोद के लिए तरस रही है और कहीं एक नन्हा बच्चा माँ की ममता के लिए। पालने के आसपास मंडराती एक चिड़िया इस मार्मिक कहानी को रहस्य और संवेदना से भर देती है।

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सर्द रात में चादर में दुबकी अकेली नवविवाहिता और खिड़की पर बैठी चिड़िया

चिड़िया

22 वर्ष की एक नवविवाहिता, दूर-दराज़ के सरकारी अस्पताल में तैनात पति और एक सुनसान सरकारी मकान। पति के दौरे पर चले जाने के बाद अकेलेपन से जूझती उस स्त्री की दुनिया माँ की यादों और किताबों के सहारे चलती है। एक सर्द रात खिड़की के बाहर चिड़िया की आवाज़ उसके भीतर दबे अतीत का ऐसा दरवाज़ा खोल देती है, जहाँ माँ का आँचल, अब्बा का दुलार और बचपन की सुरक्षित दुनिया फिर जीवित हो उठती है।

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शराबी पति की हिंसा से मुक्त होकर अकेले जीवन में सुकून तलाशती महिला

सुकून

क्या पति का साथ हमेशा सुख देता है? ‘सुकून’ एक ऐसी स्त्री की मार्मिक कहानी है, जो हिंसा और शराब की लत से भरे रिश्ते से निकलकर अकेलेपन में अपने हिस्से की शांति तलाशती है.

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मीरा तुम कहाँ हो? एक अधूरी दोस्ती और आदिवासी लड़की के संघर्ष की मार्मिक कहानी

मीरा तुम कहाँ हो

तीन दशक पहले मिली एक आदिवासी लड़की मीरा, जो पढ़ाई में बेहद होशियार थी और जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी। लेकिन परिस्थितियों ने उसकी राह रोक दी। वर्षों बाद हुई एक मुलाकात ने दोस्ती, सपनों और बिछड़ने की ऐसी कहानी छोड़ दी, जिसका सवाल आज भी कायम है मीरा तुम कहाँ हो?

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स्वाभिमान

हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।

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