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कपिल दा जवाब नहीं

देश को पहला क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव का उज्जैन दौरा पूरी तरह सादगी और अपनत्व से भरा रहा. मंगलवार को अल्प प्रवास पर उज्जैन पहुंचे कपिल देव ने किसी औपचारिक कार्यक्रम या प्रोटोकॉल से दूरी रखते हुए आम लोगों और बच्चों के बीच समय बिताया.

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भारतीय साहित्य संकल्पना और वैश्विक प्रभाव पर मंथन

विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा मराठा मंदिर साहित्य शाखा, मुंबई एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, पुणे के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संचेतना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “भारतीय साहित्य : संकल्पना और वैश्विक प्रभाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) और मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) सहित देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी में भारतीय साहित्य की वैश्विक भूमिका, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शाम को हुए कवि सम्मेलन में भारत, अमेरिका और नॉर्वे के कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन साहित्यिक आदान-प्रदान, भारतीय विचारधारा और विश्व शांति के संदेश को समर्पित रहा।

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ज्ञान परंपरा और भूगोल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में “भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेष संदर्भ में भूगोल विषय” पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज के निर्देशन में कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भूगोल विषय के पाठ्यक्रम निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करना है।

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उज्जैन में शरद जोशी की स्मृति में व्यंग्य गोष्ठी

मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन द्वारा हिन्दी व्यंग्य के प्रख्यात हस्ताक्षर शरद जोशी की स्मृति में आयोजित व्यंग्य गोष्ठी में साहित्य जगत के कई वरिष्ठ लेखक और व्यंग्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रेस क्लब, उज्जैन में किया गया, जिसमें व्यंग्यकारों ने शरद जी के अद्भुत साहित्यिक योगदान और उनके सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि शरद जोशी सम्पूर्ण व्यंग्य परम्परा के विलक्षण व्यंग्यकार थे। उनके व्यंग्य में विषयों का वैविध्य था और वे आम जीवन के सामान्य विषयों को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते थे।

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उज्जैन से संत हिरदाराम नगर के बीच श्रावण मास में विशेष ट्रेन 26 से

श्रावण मास में उज्जैन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने उज्जैन और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के बीच 26 जुलाई से 31 अगस्त तक रोज चलने वाली विशेष अनारक्षित ट्रेन की सुविधा शुरू की है। यह ट्रेन विशेष किराए पर चलेगी और महाकाल दर्शन को आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी साबित होगी।

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महाकाल की महिमा अब सिनेमा में

साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण अभिनीत मेगा बजट फिल्म ‘हरिहर वीरमल्लू (धर्मयुद्ध)’ 24 जुलाई को देशभर में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस ऐतिहासिक फिल्म में उज्जैन के भस्म रमैया भक्त मंडल को धर्म की धुरी के रूप में विशेष भूमिका मिली है। यह फिल्म विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत में किए गए मंदिरों के विध्वंस और सनातन धर्म की रक्षा में समर्पित वीरमल्लू के जीवन पर आधारित है। फिल्म में पवन कल्याण ने धर्मरक्षक वीरमल्लू की भूमिका निभाई है, जबकि बॉबी देओल औरंगज़ेब के रूप में नजर आएंगे।

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महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र

श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।

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उज्जैन फिर उज्जयिनी हो जाए

उज्जैन को उज्जयिनी नाम से फिर पहचान दिलाने का प्रयास चल रहा है — एक ऐसी नगरी जो विक्रमादित्य की राजधानी रही, कालिदास और भर्तृहरि की कर्मभूमि रही और जिसे साहित्य, ज्योतिष, संस्कृति और खगोल-विज्ञान की जन्मस्थली माना गया। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य की विरासत और उज्जयिनी के गौरव को पुनर्स्थापित करने में महती भूमिका निभाई। आज उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र तो बन गया है, लेकिन उस उज्जयिनी का साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव खोता जा रहा है। अब समय है कि उज्जयिनी को उसका प्राचीन गौरव फिर से मिले — नाम से, संवत् से और सांस्कृतिक पहचान से।

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