Image Alt Text Valentine’s Week में भारतीय कपल अलग-अलग love languages के जरिए प्यार जताते हुए

वैलेंटाइन वीक ट्रेंड नहीं, रिश्तों की समझ

वैलेंटाइन वीक को अब तक केवल दिखावा समझा जाता रहा है, लेकिन रिश्तों की बदलती समझ में इसका एक नया अर्थ सामने आया है. Rose Day से लेकर Valentine’s Day तक, इस पूरे सप्ताह का हर दिन अलग-अलग love language को दर्शाता है, जो यह बताता है कि लोग प्यार को महसूस और व्यक्त कैसे करते हैं. यही वजह है कि युवा वर्ग के बीच वैलेंटाइन वीक अब भावनाओं को समझने और रिश्तों को मजबूत करने का एक आधुनिक माध्यम बनता जा रहा है.

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जब सवाल कपड़ों का नहीं, मानसिकता का हो

भारत में बलात्कार की घटनाएँ हर उम्र और वर्ग को प्रभावित कर रही हैं छोटी बच्चियाँ, किशोर, महिलाएँ और यहाँ तक कि पुरुष भी शिकार बन रहे हैं। यह केवल शरीर का नहीं, मानसिकता का अपराध है। समाधान क़ानून के साथ-साथ शिक्षा, संवेदनशीलता और समाजिक चेतना में निहित है।

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अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल पुणे उद्घाटन समारोह"

पेन, स्याही और शब्दों का महाकुंभ

बचपन से ही पेन और स्याही हर इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं। भावनाएं हों या विचार, जानकारी हो या कल्पना शब्दों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम यही लेखन उपकरण रहे हैं। इसी लेखन संस्कृति का उत्सव मनाने जा रहा है पुणे, जहां 10 और 11 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है।

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नारी — जननी भी, शक्ति भी

नारी गहनों या दौलत की चाह नहीं रखती, उसे चाहिए सिर्फ़ सम्मान और बराबरी का हक़। वह माँ है, बहन है, बेटी है और पत्नी है—हर रूप में जीवन को सँवारती है। उसके भी अपने सपने हैं, अपनी इच्छाएँ हैं। लेकिन समाज अक्सर उसे कमज़ोर समझकर उसकी स्वतंत्रता छीनने की कोशिश करता है। सच्चाई यह है कि नारी कोमल ज़रूर है, पर निर्बल नहीं। वह कर्तव्यों का पालन करती है और प्रेम से जीती है। इसलिए ज़रूरी है कि हम उसकी भावनाओं और अस्तित्व का सम्मान करें।

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एडोर डायबिटीज रिवर्सल सेंटर का नया स्थान

पुणे स्थित अडोर डायबिटीज रिवर्सल काउंसलिंग सेंटर ने दीक्षित जीवनशैली के माध्यम से हजारों मरीजों को दवा के बिना मधुमेह नियंत्रित करने में मदद की है। अब तक 3500 से अधिक रोगियों ने पंजीकरण कराया है और सैकड़ों ने बिना दवा के HbA1c स्तर को 6.5 से नीचे बनाए रखा है। वरिष्ठ मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. जगन्नाथ दीक्षित के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र अब नल स्टॉप के पास नए स्थान पर स्थानांतरित हुआ है, जहां सभी सेवाएं पूर्णतः नि:शुल्क उपलब्ध होंगी।

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ये क्या हुआ

यह कविता उस कटु सच्चाई पर चोट करती है, जहाँ विचार और कलम दोनों की नीलामी होने लगी है। जहाँ डर और लालच ने उन लोगों को भी झुका दिया, जो कभी सिद्धांतों के आसमान हुआ करते थे। आज हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सच बोलने वाले लोग ही गायब हो गए हैं और जिन्हें समाज की आत्मा माना जाता था, वही बिक चुके हैं। अब सवाल सिर्फ़ यही है ये सिलिसिला किसने शुरू किया? और कब तक चलता रहेगा?

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…जब मोहब्बत नुमाइश बन गई

अब मोहब्बत भी लिबासों की तरह हो गई है – रोज़ बदलती, ज़माने की रवायत बन चुकी। कभी जो खतों में दिल की धड़कनें उतरती थीं, अब वो सिलसिला कहीं खो गया है। प्यार की जगह नुमाइश रह गई है।

इश्क़ का मिज़ाज देखकर लगता है कि लोगों के पास अब बस फुरसत ही फुरसत है, लेकिन मोहब्बत की असल सदाएं कहीं गुम हो गई हैं। चाहत अब इबादत बनकर रह गई है, और वफ़ा के नाम पर धोखे मिलना किस्मत। आज दुआएं भी सिक्कों में लुटती हैं, अमीरी भी ज़लालत सी लगने लगी है। इरादों को गलत अंजाम देना दीवानों की हिमाकत कहलाता है और बिना वजह इल्ज़ाम लगाना, सियासत।

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अगर मैं किसी सुबह न उठूँ…

जिस सुबह वह नहीं उठी, वह हार नहीं थी वह एक चुप विदाई थी।रोज़ के झगड़ों, टूटती उम्मीदों और खुद को खो देने की थकान का अंत। जिसे वह प्रेम समझती रही, वह पत्थर निकला, और जिसे वह बचाती रही, वही उसे तोड़ता रहा।

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नवरात्रि: भक्ति से शक्ति की यात्रा

“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह हमें हमारे भीतर की सुप्त शक्ति को पहचानने, हर कठिनाई में छिपे वरदान को देखने और आत्मविश्वास से अंधकार को मिटाने की प्रेरणा देता है।”

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संतोष बड़ा धन

तिरुवल्लुवर तमिलनाडु के एक महान संत, कवि और दार्शनिक थे. दूर-दूर से लोग उनसे मार्गदर्शन लेने आते. एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, गुरुजी, इतने विद्वान होने के बावजूद आप दयनीय हालत में गुजारा करते हैं. आपकी बातों से हमें क्या मिलेगा?तिरुवल्लुवर मुस्कुराए और उस व्यक्ति से पूछा क्या तुम मेरे साथ एक यात्रा…

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