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स्पीड ब्रेकर ने लौटाई सांसें

इसे चमत्कार ही कहा जाएगा! उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र में एक महिला, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, एक स्पीड ब्रेकर के झटके से फिर से जीवित हो उठी. मृत महिला की सांसें लौटीं, यह घटना पूरे गांव और समाज के लिए कौतूहल और खुशी का विषय बन गई है.
खाचरोद की रहने वाली 75 वर्षीय अयोध्या बाई की 20 अगस्त को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उनके बेटे उन्हें तुरंत इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल ले गए. जांच में पता चला कि उनके सिर की नस फट गई है.

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अपने बच्चे को गोद में लेकर स्नेहपूर्वक लोरी सुनाती एक भारतीय माँ का भावनात्मक दृश्य।

माँ

माँ’ एक ऐसी भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग, ममता और समर्पण को सरल शब्दों में चित्रित करती है। यह कविता बताती है कि माँ हर परिस्थिति में अपने परिवार की खुशियों को सबसे पहले रखती है और स्वयं का सुख भूल जाती है।

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नेत्रदान और देहदान कर अमर हो गईं सुशीला दिवेकर

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बचाय अपने चिकित्सकीय प्रोफेशन को सर्वोपरि मानते हुए चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि दिवेकर ने अपनी माता सुशीला दिवेकर की पार्थिव देह दान कर दी। इससे पहले 77 वर्षीय दिवेकर के नेत्रदान भी कराए गए। प्रशासन और पुलिस ने ऐसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इसे अनुकरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली घटना बताया।

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गांव के खेतों और कच्चे रास्ते के बीच खड़ा एक व्यक्ति, जो बचपन की यादों में खोया हुआ है

गांव की माटी की वो खुशबू

शहर की भीड़ और ऊँची इमारतों के बीच खड़े होकर भी मन बार-बार उसी गांव की ओर लौट जाता है, जहाँ माटी की खुशबू, माँ के हाथों की गरमाहट और रिश्तों की सच्चाई आज भी दिल में ज़िंदा है।

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प्रेम की छोटी सी सल्तनत

एक छोटी-सी सल्तनत, कुछ किताबें, एक बिस्तर और दो दिल—इस कहानी में प्रेम के वे पल कैद हैं जो हँसी और आँसुओं के बीच कहीं मुकम्मल होते हैं। कभी झिझक, कभी झेंप, और एक आलिंगन—जो बरसों बाद भी उतना ही सुकून देता है जितना पहली बार।

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मुंबई – रत्नागिरी के बीच 6 अतिरिक्त होली

होली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए पनवेल–रत्नागिरी के बीच 6 अनारक्षित मेमू विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी. साथ ही दिवा–चिपलून स्पेशल की तिथियों में बदलाव किया गया है. रेलवे ने यात्रियों से संशोधित समय सारणी की जानकारी लेने की अपील की है.

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डिब्बे वाले

“सब की भूख का हिसाब रखने वाले, अपनी भूख को कैसे दबा कर रख पाते होंगे?”
यह पंक्ति डिब्बे वालों के जीवन की मार्मिक विडंबना को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है — वे जो दूसरों की भूख मिटाते थे, स्वयं भूखे रह गए।

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बहू नहीं कोई देवी हो

यह कहानी नारी के कर्तव्य, परिश्रम और ससुराल में सम्मान पाने की प्रेरक कहानी है। नीरा, स्वभाव से मेहनती, संवेदनशील और न्यायप्रिय, अपने सास-ससुर के प्रति समर्पित रहती है। शादी के बाद पति के ड्यूटी पर चले जाने के बावजूद वह अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होती।

कठोर व्यवहार और अन्याय के बावजूद नीरा अपने नेकनीयती और परिश्रम से अपने सास-ससुर को उचित सम्मान दिलाती है। उसके इस समर्पण और अपनापन को देखकर परिवार और समाज भी उसे आदर और सम्मान देने लगते हैं। कहानी में नारी शक्ति, सशक्तता और पारिवारिक प्रेम का संदेश प्रमुख रूप से उजागर है।

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परीक्षा हॉल में चिंतित छात्र, NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता दृश्य।

नीट पेपर लीक : जिम्मेदार कौन?

NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के सपनों और विश्वास पर गहरा आघात है। वर्षों की मेहनत, परिवारों के त्याग और युवाओं के संघर्ष के बाद जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, तो केवल परीक्षा नहीं टूटती, बल्कि पूरा भरोसा बिखर जाता है। अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, दोषियों को कठोर सजा मिले और ऐसी पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जहाँ मेहनत का मूल्य पैसों और पहुंच से अधिक हो।

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भगवान हनुमान भक्तों को आशीर्वाद देते हुए, परिवार की रक्षा करते हुए

संकटमोचन हनुमान

हनुमान जी को माता-पिता समान मानकर यह कविता उनके संरक्षण, दया और शक्ति की प्रार्थना करती है, जहां भक्त जीवन के दुखों से पार लगाने की विनती करता है.

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