
प्रमिला त्रिवेदी
हम सभी मुसाफ़िर हैं
इस जीवन की राह के,
कोई कुछ दूर साथ चलता है,
कोई उम्रभर की याद बन जाता है।
किसी राह पर धूप मिली,
तो किसी मोड़ पर छाँव मिली,
कहीं अपनों का साथ मिला,
तो तन्हाई भी संग मिली।
हम मंज़िलों की तलाश में
कितने रास्ते बदलते रहे,
कभी जीत पर मुस्कुराए,
कभी हार से संभलते रहे।
जो मिला, उसे अपना समझा,
जो बिछड़ा, उसे यादों में रख लिया,
समय ने जो सिखाया जीवन में,
उसे चुपचाप स्वीकार कर लिया।
मुसाफ़िर को कहाँ पता होता है
कि अगला पड़ाव कैसा होगा,
बस विश्वास की एक छोटी-सी रोशनी
हर अँधेरे में साथ चलती है।
इसलिए राह कठिन हो तो भी
कदमों को रुकने मत देना,
जो मिले, उसे प्रेम देना,
और जो चला जाए, उसे दुआ देना।
क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है—
हम यहाँ ठहरने नहीं आए,
बस कुछ पल का सफ़र है यह।
मुसाफ़िर हैं हम…
और एक दिन अपनी मंज़िल की ओर
चुपचाप लौट जाएँगे।
